ठ: मंत्र बीज का अर्थ

ठ: मंत्र बीज का अर्थ

ठ: मंत्र बीज का अर्थ


नमस्ते मित्रों ,
श्रीविद्या पीठम में आपका स्वागत हैं ।

जब आप मंत्र पढ़ते हैं । तब उसमें कुछ पेचीदे मंत्र भी आते हैं । जिनके शब्द का उच्चारण भी अलग हो जाता हैं ।
आप में से कितने साधक अलग अलग मंत्रो को जप करते हैं । परंतु हर बीजाक्षर का अर्थ क्या होता हैं ? हर बीजाक्षर में कौनसे तत्व जोड़े गए हैं ? बीजों का स्वभाव क्या हैं ? ऐसे काफी विषय होते हैं ।

इन्ही सब बीजाक्षरों में एक ठ: नामका अक्षर आता हैं । इस ठ: बीज का अर्थ क्या हैं ?
श्रीविद्या साधना में श्रीमहावाराही देवी के साधना में ठ: अक्षर मंत्र में आता हैं ।

ठ: ठ: बोलेंगे तो ध्वनि पेट से निकलता हैं । इसलिए यहाँ पेट नाभि को महत्व हैं । वह एक प्राणायम भी हैं । वाराही देवी ललिता के नाभि से निकली हुई हैं , इसलिए वाराही को मातृरूपा कहा गया हैं । इसलिए वाराही के मंत्रो में ठ: बीज का महत्व आता हैं ।
ठ शब्द पेट शब्द निकलता हैं । मनुष्य का जन्म भी पेट से होता हैं ।

ठ मतलब ठुमहार शक्ति ।
मनुष्य के अंदर की इच्छाओं पर मात करके ऊपर आना , वही ठ हैं ।

ठ यह ध्यान भी हैं और शब्दब्रह्म का छोटा ध्वनि भी हैं ।

ठ: में श्रीविद्या के चेटक तत्वो का ज्ञान और ऊर्जा भी आता हैं ।

अगर आप नीचे की आकृति देखेंगे । तो ठ: शब्द में कैसे पृथ्वी तत्व , श्रीविद्या ज्ञान , कामेश्वर कामेश्वरी की ऊर्जा आती हैं , वह देखिए ।

Article and Chart Publish by SriVidyaPitham.

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