तंत्र साधना में ” ग्रह लगना ” … क्या हैं ?

🔻 साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” , क्या हैं ? 🔻

ह्रीं
नमस्ते मित्रों , श्रीविद्या पीठम में आपका स्वागत है।

Article Publish by SriVidya Pitham

कुछ लोगो ने सुना होगा , कोई व्यक्ति बहुत सारी पूजापाठ कर रहा है अथवा अलग अलग मंत्र तंत्र कर रहा है और उसके कारन उसकी मानसिक शारिरिक स्तिथी बिगड़ गई हैं , तो उस व्यक्ति को ग्रह लगा हैं । ऐसा आम तौर पर साधना मार्ग में बोला जाता हैं ।

ये एक भाषा है आध्यात्मिक जगत की , कुछ लोग इसको ऐसा भी कहते है कि बहुत ज्यादा मंत्र तंत्र करने से दिमाग घूम गया है अथवा वाममार्ग में कोई कहेगा , गलत विद्याओ के चक्कर में पड़ने से उसको चेटिका लगी हैं ।

अब ग्रह लगना ? अंदाजन अर्थ तो समझ आया होगा आपको ।

ग्रह कब लगता है ?

यहां कोई ग्रह लगना मतलब सूर्य चन्द्र राहु शनि ग्रह लगा है , ऐसा शब्दप्रयोग नहीं हैं ।

अब देखिए , दुनिया में न जाने कितने लोग कितनी कितनी साधना , मंत्र , तंत्र , यंत्र करते हैं । इसमें बहुत सी संख्या यहां वहां से किताबे देखकर , ब्लॉग देखकर नेट से अथवा किसी न किसी गुरु से मंत्र तंत्र ग्रहण करते हैं । किसका उद्देश क्या होगा , वही जाने ।
बहुतों को लगता है की , वे भगवती को प्रसन्न करेंगे , कुछ को लगता है वो सिद्ध बन जायेंगे और कुछ बस सेवा करना चाहते हैं । पर कुछ समय बाद होता उलटा हैं और तीनों टाईप के लोगो में , उनका रचाया मंत्र तंत्र उल्टी विपरीत दिशा में घूमकर उनके ही सर पर बैठ जाता हैं।

जिससे की बहुत लोग बाद में मानसिक दृष्टि से अस्वस्थ , तनावग्रस्त , स्वभाव से विचित्र बन जाते हैं । शारीरिक स्थिति कौटुंबिक स्थिति भी बिगड़ जाती हैं । पहले जब कुछ नहीं करते थे तब अच्छा था , पर अब उस मंत्र तंत्र को इतना कर लिया कि सब उल्टा हो गया । इसको ग्रह लगना कहा है ।

बहुत ही कम लोग होते हैं , जिनको उस शक्ति के द्वारा सही मार्ग मिलता हैं । अब ये संभव है की ,जिसके ऊपर पुर्वजन्म का पुण्य संचय हो अथवा किसीको गुरु से सही दिशा मिली हो । तथा मंत्र तंत्र की अलग अलग स्तर होते हैं , किस स्तर की विद्या के मंत्र हमे किस प्रकार से लेना चाहिए इसकी भी एक मर्यादा नियम होते हैं। जब मर्यादाओं का उल्लंघन होता हैं , तब जाकर ग्रह लगना जैसे क्रियाए होती हैं ।

सामन्य स्तर के मंत्रो में तांत्रिक मंत्र प्रयोग नही आते , उदाहरण : ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । , ॐ नमः शिवाय । , ॐ दुं दुर्गाय नमः । ई
मध्यम स्तर के मंत्रो में दुर्गाओं के मंत्र , उपमहाविद्याओ के समकक्ष शक्तियां आती है । नव दुर्गा , शूलिनी , वनदुर्गा , थोड़ीसी उग्र शक्तियां , भैरवो की साधना वगैरा ।
उच्चे स्तर पर की विद्याओ में अघोर , उग्रतम , दसमहाविद्याएं , वाममार्गी आती हैं । ( अंदाजन बता रहा हूँ । )

बड़ी ऊंचे स्थान की महाविद्याओं की गुरूपादुका बिना , सही पूजा विधान के बिना मंत्र जाप नहीं होते । मंत्र जाप की विधि यह किसी भी साधना की अंतिम स्टेज होती हैं । तर्पण अभिषेक यंत्र पूजन होमम से सब उस शक्ति का चैतन्य बढ़ जाता हैं तब मंत्रो के जाप शुरू हो जाते हैं । और उनकी उष्णता को संकुचित करने के भी तरीके होते हैं ।

ग्रह लगना मतलब सूर्य राहु केतु ग्रह नहीं , बल्कि अशुभ शुभ आत्माए किसी साधक के शरीर पर हावी होते हैं , उसीको कहा है ।

ग्रहों में कितने प्रकार होते हैं ?
1. दिव्य ग्रह ( स्त्री और पुरुष ग्रह )
2. अदिव्य

आज हम दिव्य ग्रह के संदर्भ में जानकारी लेते हैं ।
इनमें भी स्त्री ग्रह और पुरुष ग्रह ऐसे दो प्रकार होते हैं। वैसे तो दोनों ग्रह मनुष्यो को पकड़ सकते हैं । आपने कभी कभी देखा होगा किसीके ऊपर भूत प्रेत आते हैं और किसीपर देव आते हैं । इसके बारे में शास्त्र क्या कहते हैं , इसिपर एक नजर डालेंगे ।

पुरुष ग्रह में 7 प्रकार होते हैं ।
( देव गंधर्व नाग यक्ष ब्रम्ह राक्षस भूत व्यंतर )
सबकी ऊर्जा अलग अलग है और उनके किसी मनुष्य को पकड़ने का कारण भी अलग अलग है । देव शक्ति वाली ऊर्जा सामन्य व्यक्ति को नही पकड़ेंगे , वे कोई उत्तम साधक के शरीर का ही सहारा लेंगे । राक्षस और भूत तत्व की उर्जा होने वाली शक्तियां ज्यादातर गलत साधना मंत्र बोलने वाले , आभिचारिक प्रयोग करने वालों को पकडते हैं । गंधर्व शक्तियां कलाकार क्षेत्र संबधी व्यक्ति के शरीर का आसरा लेकर कार्य करते हैं ।

देव सदा पवित्र स्थान पर रहते हैं , नाग हमेशा सोता है और अंग तोड़ मरोड़ डालता है , यक्ष बहुत प्रकार से रोता है हँसता है , गन्धर्व अनेको कलाएँ दिखाता है , ब्रम्हराक्षस शाम को जप करता है वेद पढ़ता है और घमंडी रहता है , भूत आँखे फाड़ फाड़ कर देखता हैं और शिथिल गति से जांभई देता है , वो पागलो की तरह रहेंगा ।

स्त्री ग्रह में 9 प्रकार होते हैं ।
( काली कंकाली कराली कालराक्षसी जंघि प्रेताशिनी यक्षी वेताली और क्षेत्रवासिनी )
काली से पकड़े हुए का शरीर कृष्णवर्णीय बनता हैं और हथेली नेत्रों में जलन लगती हैं । कराली से पीड़ित व्यक्ति अन्न नहीं खाता । कंकाली से पकड़े हुए का शरीर पिला पड़ जाता हैं । राक्षसी से पकड़ा हुआ व्यक्ति जोर से अट्टहास करेगा , सोयेगा नहीं , रात्रि में घूमेगा नहीं । जंघि से पीड़ित व्यक्ति कृश हो जाता हैं । प्रेताशिनी वाला व्यक्ति भय वाले आवाजे निकालता हैं और दांत ओठ चबाता है । यक्षी पीड़ित व्यक्ति स्त्री से दूर रहता है । वेताली बाधित का मुँह सुख जाता हैं । क्षेत्रवासिनी ग्रसित व्यक्ति पागलो की तरह नाचता है और हँसता है , बहुत वेग से दौड़ता है ।

इसलिए , साधना क्षेत्र में मार्गदर्शक उत्तम होना जरूरी हैं और साधना की प्रोसेस भी सही होनी चाहिए । 

©
धन्यवाद ।

SriVidya Pitham , Thane
Contact : 09860395985 Whatsapp
Email ID : sripitham@gmail.com

Share

Written by:

181 Posts

View All Posts
Follow Me :

One thought on “तंत्र साधना में ” ग्रह लगना ” … क्या हैं ?

  1. आदरणीय अनामदेव जी को मेरा प्रणाम ,
    उपरोक्त लेख मे जो आपने बताया है वह अति महत्वपूर्ण योगदान है।
    अब आपसे अनुरोध है की इसका उपाय भी बताने की कृपा करें।
    इस समस्या का निवारण क्या है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

four × five =

error: Content is protected !!
× How can I help you?