श्रीविद्या अंतर्गत श्रीहयग्रीव अवतार  ( Sri Hayagreeva Devta )

श्रीविद्या अंतर्गत श्रीहयग्रीव अवतार  ( Sri Hayagreeva Devta )

II  श्रीविद्या अंतर्गत श्रीहयग्रीव अवतार  II

ह्रीं
नमस्तेस्तु मित्रों , श्रीविद्या पीठम में स्वागत हैं ।
अक्षयतृतीया के इस शुभ मुहूर्त पर श्रीविद्या के महान आचार्य तथा श्रीअगस्ति महामुनि के श्रीविद्या के गुरु श्रीहयग्रीव जी का अवतार धारण हुआ था ।

वैष्णव संप्रदाय में श्रीहयग्रीव अवतार बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हैं । घोड़े के मुख वाले भगवान विष्णु के स्वरूप को ही श्रीहयग्रीव रूप कहा गया हैं । यह सफेद रंग के घोड़े के रूप में हैं , जिनकी नाक तेज गंध को भी सूंघ लेती हैं और कान दूर का सुनने की क्षमता रखते हैं । इनमें बुद्धि का तीव्र विकास होता हैं । इसलिए ही श्रीविद्या साधना बौद्धिक संपदा तथा आध्यात्मिकता की बारकाई के लिए श्रीहयग्रीव साधना का समावेश हैं ।

श्रीविद्या में इनका महत्व क्या हैं ?

अगस्ति मुनी जी को जब प्रश्न पडा की संपूर्ण सृष्टि की रचना करने वाली मूल महाशक्ति कौन हैं ? तब उनके कठोर तपस्या से भगवान हयग्रीव प्रगट हुए । उनिके प्रार्थना पर श्रीललिता सहस्रनाम और श्रीललिता त्रिशती की उतपत्ति हुई । वशिनी आदि वाग्देवीयो ने श्रीललिता के आशीर्वाद से हयग्रीव और अगस्ति जी के सामने इसको प्रगट किया । श्रीअगस्ती मुनी जी को श्रीविद्या का पवित्र ज्ञान और दीक्षा देने वाले वही हैं ।

अगर आप श्रीललिता सहस्रनाम का अभ्यास करेंगे तो श्रीअगस्ती मुनी और श्रीदत्तात्रेय परंपरा में श्रीविद्या की क्रम दीक्षा में समानता दिखती हैं । दोनों में भी श्रीमहागणेश की साधना का उल्लेख है और श्रीराजमातंगी , श्रीवाराही , श्रीकुरुकुल्ला आदि दीक्षाओ का उल्लेख हैं ।

श्रीहयग्रीव जी , आधा घोड़े का शरीर और आधा मनुष्य का शरीर इस तरह का रूप हैं । हयग्रीव रूप एक संपूर्ण ज्ञान रूपी गुरु , संपूर्ण इच्छाशक्ति , मन का वेग और प्रचंड बल का प्रतीक हैं ।

श्रीहयग्रीव साधना के फलश्रुती ,

श्रीहयग्रीव जी का पूजन श्रीविद्या साधना में एकाग्रता , दौड़ , किसी भी विषय की गति को पकड़ना , बौद्धिक क्षमता विकसित करना , जैसे रेस में घोड़ा दौड़ता हैं और युद्ध में भी वैसे ही हयग्रीव साधना स्पर्धात्मक यश नोकरी इनके लिए सुंदर होती हैं । आपको अगर कोई दुर्लक्षित कर रहा है , बहुत आलस भरा है उनके लिए महत्वपूर्ण हैं । विद्यार्थी , शिक्षक , रिसर्चर , आध्यात्मिक विषय में गति पकड़ने के लिए यह हयग्रीव साधना महत्वपूर्ण भूमिका है । विद्यार्थि , शिक्षक , विद्यापीठो के कक्ष में इनकी तस्वरी होनी चाहिए । भावनिक दबाव , तनाव से निकालने में ये देवता मदत करते हैं । गर्भवती महिलाओं को इनकी साधना जरूर करनी चाहिए , आने वाला बच्चा बौद्धिक विकसित तेज होने के लिए तथा उसका शरीर भी बलवान होना चाहिए । खेलकूद , एथेलीट इनके लिए तो ये वरदान स्वरूप हैं।

श्रीहयग्रीव गायत्री मंत्र :
ॐ वाणीश्वराय विद्महे हयग्रीवा धीमहि तन्नो: ह्याग्रीवः प्रचोदयात  ll

श्रीहयग्रीव सामन्य मंत्र :
श्रीहयग्रीव सहित श्रीमहालक्ष्मी श्रीपादुकां पुजयामी तर्पयामी ll

Festivals associated with Lord Hayagriva

 Swarna Pournami on the full moon day of August.
* Mahanavami on the ninth day of Navarathri.

Famous Temples of Lord Hayagriva

* Tiruvahindapuram Hayagriva Temple, near Cuddalore, Tamil nadu
* Chettypunyam Hayagriva temple, near Chengalpattu,Tamil Nadu
* Sri Lakshmi Hayagriva temple, Nanganallur, Chennai
* Sri Lakshmi Hayagriva temple, Mohnur, Karnataka
* Sri Hayagriva Madhava Temple, Hajo, Assam
* Sri Lakshmi Hayagriva temple, Muthialpet, Pondicherry

© धन्यवाद ।
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