साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” Part – 1

साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” Part – 1

? साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” , क्या हैं ? ?

Part 1

ह्रीं
नमस्ते मित्रों , श्रीविद्या पीठम में आपका स्वागत है।

कुछ लोगो ने सुना होगा , कोई व्यक्ति बहुत सारी पूजापाठ कर रहा है अथवा अलग अलग मंत्र तंत्र कर रहा है और उसके कारन उसकी मानसिक शारिरिक स्तिथी बिगड़ गई हैं , तो उस व्यक्ति को ग्रह लगा हैं । ऐसा आम तौर पर साधना मार्ग में बोला जाता हैं ।

ये एक भाषा है आध्यात्मिक जगत की , कुछ लोग इसको ऐसा भी कहते है कि बहुत ज्यादा मंत्र तंत्र करने से दिमाग घूम गया है अथवा वाममार्ग में कोई कहेगा , गलत विद्याओ के चक्कर में पड़ने से उसको चेटिका लगी हैं ।
अब ग्रह लगना ? अंदाजन अर्थ तो समझ आया होगा आपको । 
ग्रह कब लगता है ? यहां कोई ग्रह लगना मतलब सूर्य चन्द्र राहु शनि ग्रह लगा है , ऐसा शब्दप्रयोग नहीं हैं ।

अब देखिए , दुनिया में न जाने कितने लोग कितनी कितनी साधना , मंत्र , तंत्र , यंत्र करते हैं । इसमें बहुत सी संख्या यहां वहां से किताबे देखकर , ब्लॉग देखकर नेट से अथवा किसी न किसी गुरु से मंत्र तंत्र ग्रहण करते हैं । किसका उद्देश क्या होगा , वही जाने ।

बहुतों को लगता है की , वे भगवती को प्रसन्न करेंगे , कुछ को लगता है वो सिद्ध बन जायेंगे और कुछ बस सेवा करना चाहते हैं । पर कुछ समय बाद होता उलटा हैं और तीनों टाईप के लोगो में , उनका रचाया मंत्र तंत्र उल्टी विपरीत दिशा में घूमकर उनके ही सर पर बैठ जाता हैं।

जिससे की बहुत लोग बाद में मानसिक दृष्टि से अस्वस्थ , तनावग्रस्त , स्वभाव से विचित्र बन जाते हैं । शारीरिक स्थिति कौटुंबिक स्थिति भी बिगड़ जाती हैं । पहले जब कुछ नहीं करते थे तब अच्छा था , पर अब उस मंत्र तंत्र को इतना कर लिया कि सब उल्टा हो गया । इसको ग्रह लगना कहा है ।

बहुत ही कम लोग होते हैं , जिनको उस शक्ति के द्वारा सही मार्ग मिलता हैं । अब ये संभव है की ,जिसके ऊपर पुर्वजन्म का पुण्य संचय हो अथवा किसीको गुरु से सही दिशा मिली हो । तथा मंत्र तंत्र की अलग अलग स्तर होते हैं , किस स्तर की विद्या के मंत्र हमे किस प्रकार से लेना चाहिए इसकी भी एक मर्यादा नियम होते हैं। जब मर्यादाओं का उल्लंघन होता हैं , तब जाकर ग्रह लगना जैसे क्रियाए होती हैं ।

सामन्य स्तर के मंत्रो में तांत्रिक मंत्र प्रयोग नही आते , उदाहरण : ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । , ॐ नमः शिवाय । , ॐ दुं दुर्गाय नमः ।
मध्यम स्तर के मंत्रो में दुर्गाओं के मंत्र , उपमहाविद्याओ के समकक्ष शक्तियां आती है । नव दुर्गा , शूलिनी , वनदुर्गा , थोड़ीसी उग्र शक्तियां , भैरवो की साधना वगैरा ।
उच्चे स्तर पर की विद्याओ में अघोर , उग्रतम , दसमहाविद्याएं , वाममार्गी आती हैं । ( अंदाजन बता रहा हूँ । )

बड़ी ऊंचे स्थान की महाविद्याओं की गुरूपादुका बिना , सही पूजा विधान के बिना मंत्र जाप नहीं होते । मंत्र जाप की विधि यह किसी भी साधना की अंतिम स्टेज होती हैं । तर्पण अभिषेक यंत्र पूजन होमम से सब उस शक्ति का चैतन्य बढ़ जाता हैं तब मंत्रो के जाप शुरू हो जाते हैं । और उनकी उष्णता को संकुचित करने के भी तरीके होते हैं ।

इस तरह से एक लंबा विषय हैं , इसलिए कहा जाता हैं । अगर आप कोई महाविद्या उपविद्याओ का अभ्यास करो तो गुरु के सानिध्य अथवा मार्गदर्शन से करो । और ये विद्याओ के मंत्र तंत्र भीड़ में नहीं सिखाए जाते ।
ग्रह लगना ? इस लेख में अगले पार्ट में , ग्रह कितने प्रकार के लगते हैं और किस प्रकार के लोगो को किस उद्द्येश्य से लगते हैं ? ई देखेगे ।
धन्यवाद ।
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