साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” Part – 1

साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” Part – 1

🔻 साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” , क्या हैं ? 🔻

Part 1

ह्रीं
नमस्ते मित्रों , श्रीविद्या पीठम में आपका स्वागत है।

कुछ लोगो ने सुना होगा , कोई व्यक्ति बहुत सारी पूजापाठ कर रहा है अथवा अलग अलग मंत्र तंत्र कर रहा है और उसके कारन उसकी मानसिक शारिरिक स्तिथी बिगड़ गई हैं , तो उस व्यक्ति को ग्रह लगा हैं । ऐसा आम तौर पर साधना मार्ग में बोला जाता हैं ।

ये एक भाषा है आध्यात्मिक जगत की , कुछ लोग इसको ऐसा भी कहते है कि बहुत ज्यादा मंत्र तंत्र करने से दिमाग घूम गया है अथवा वाममार्ग में कोई कहेगा , गलत विद्याओ के चक्कर में पड़ने से उसको चेटिका लगी हैं ।
अब ग्रह लगना ? अंदाजन अर्थ तो समझ आया होगा आपको । 
ग्रह कब लगता है ? यहां कोई ग्रह लगना मतलब सूर्य चन्द्र राहु शनि ग्रह लगा है , ऐसा शब्दप्रयोग नहीं हैं ।

अब देखिए , दुनिया में न जाने कितने लोग कितनी कितनी साधना , मंत्र , तंत्र , यंत्र करते हैं । इसमें बहुत सी संख्या यहां वहां से किताबे देखकर , ब्लॉग देखकर नेट से अथवा किसी न किसी गुरु से मंत्र तंत्र ग्रहण करते हैं । किसका उद्देश क्या होगा , वही जाने ।

बहुतों को लगता है की , वे भगवती को प्रसन्न करेंगे , कुछ को लगता है वो सिद्ध बन जायेंगे और कुछ बस सेवा करना चाहते हैं । पर कुछ समय बाद होता उलटा हैं और तीनों टाईप के लोगो में , उनका रचाया मंत्र तंत्र उल्टी विपरीत दिशा में घूमकर उनके ही सर पर बैठ जाता हैं।

जिससे की बहुत लोग बाद में मानसिक दृष्टि से अस्वस्थ , तनावग्रस्त , स्वभाव से विचित्र बन जाते हैं । शारीरिक स्थिति कौटुंबिक स्थिति भी बिगड़ जाती हैं । पहले जब कुछ नहीं करते थे तब अच्छा था , पर अब उस मंत्र तंत्र को इतना कर लिया कि सब उल्टा हो गया । इसको ग्रह लगना कहा है ।

बहुत ही कम लोग होते हैं , जिनको उस शक्ति के द्वारा सही मार्ग मिलता हैं । अब ये संभव है की ,जिसके ऊपर पुर्वजन्म का पुण्य संचय हो अथवा किसीको गुरु से सही दिशा मिली हो । तथा मंत्र तंत्र की अलग अलग स्तर होते हैं , किस स्तर की विद्या के मंत्र हमे किस प्रकार से लेना चाहिए इसकी भी एक मर्यादा नियम होते हैं। जब मर्यादाओं का उल्लंघन होता हैं , तब जाकर ग्रह लगना जैसे क्रियाए होती हैं ।

सामन्य स्तर के मंत्रो में तांत्रिक मंत्र प्रयोग नही आते , उदाहरण : ॐ नमो भगवते वासुदेवाय । , ॐ नमः शिवाय । , ॐ दुं दुर्गाय नमः ।
मध्यम स्तर के मंत्रो में दुर्गाओं के मंत्र , उपमहाविद्याओ के समकक्ष शक्तियां आती है । नव दुर्गा , शूलिनी , वनदुर्गा , थोड़ीसी उग्र शक्तियां , भैरवो की साधना वगैरा ।
उच्चे स्तर पर की विद्याओ में अघोर , उग्रतम , दसमहाविद्याएं , वाममार्गी आती हैं । ( अंदाजन बता रहा हूँ । )

बड़ी ऊंचे स्थान की महाविद्याओं की गुरूपादुका बिना , सही पूजा विधान के बिना मंत्र जाप नहीं होते । मंत्र जाप की विधि यह किसी भी साधना की अंतिम स्टेज होती हैं । तर्पण अभिषेक यंत्र पूजन होमम से सब उस शक्ति का चैतन्य बढ़ जाता हैं तब मंत्रो के जाप शुरू हो जाते हैं । और उनकी उष्णता को संकुचित करने के भी तरीके होते हैं ।

इस तरह से एक लंबा विषय हैं , इसलिए कहा जाता हैं । अगर आप कोई महाविद्या उपविद्याओ का अभ्यास करो तो गुरु के सानिध्य अथवा मार्गदर्शन से करो । और ये विद्याओ के मंत्र तंत्र भीड़ में नहीं सिखाए जाते ।
ग्रह लगना ? इस लेख में अगले पार्ट में , ग्रह कितने प्रकार के लगते हैं और किस प्रकार के लोगो को किस उद्द्येश्य से लगते हैं ? ई देखेगे ।
धन्यवाद ।
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One thought on “साधना मार्ग में ” ग्रह लगना ” Part – 1

  1. Mere pitaji guru logo se mantr lekr sidh krke apne ghar ki dekhbhal krte the abhi kuchh bhi nhi kr pate inki memory bahut kamjor ho gaya hai.village walo se dusmani hai bap dada ke jamane se hai.mere pitaji dekhbhal krke thik krte the . village wale bar 2 mere family pr tn mn dhan maran uchhachatan krte rhte hai kya kiya jay ki mere pitaji thik ho jay chal nhi pate pair kamjor hai brain heart problem hai.mai babaji ka video dekhkr positive thinking krta hu but normal nhi ho rha hai upay btaye namah shivay babaji

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