जैन तंत्र का प्राचीन ” नागमंडल यंत्र “

जैन तंत्र का प्राचीन ” नागमंडल यंत्र “

जैन तंत्र का प्राचीन ” नागमंडल यंत्र “

नमस्ते मित्रों ,
श्रीविद्या पीठम अलग अलग विषयों का संशोधन करता हैं । ज्यादातर हम ऐसे अद्भुत विषयों का संशोधन करते हैं , जो अन्य जगह उपलब्ध नहीं हैं । प्राचीन शास्त्र , प्राचीन तंत्र – यंत्र , प्राचीन भाषा ई. विषय पर अधिक जानकारी पूर्ण ज्ञान से उपलब्ध नहीं हो पाती ।

Article Publish by : SriVidya Pitham ( 9860395985 )

श्रीस्वामी समर्थ महाराज और नागलोकीय गुरूमण्डल के आशीर्वाद द्वारा हमें काफी ज्ञान मिल जाता हैं । अतः उनका में आभारी रहूंगा ।

प्रस्तुत यंत्र जैन तंत्र का एक पुराना चित्र हैं , गुजरात में ब्रिटिशों को मिला ऐसा कहा जाता हैं ।
ब्रिटिशों ने लंबे अरसे तक काफी प्राचीन चीजें अपने देश लेकर चले गए । काफी विषयों पर संशोधन हुआ नहीं ।
प्रस्तुत नागमंडल विषय पर कही भी जानकारी उपलब्ध नहीं हैं ।
अगर आप देवताओं में सर्वश्रेष्ठ कौन हैं ? ऐसा प्रश्न करेंगे तो उत्तर आएंगा , नाग शक्तियाँ ।
दक्षिण भारत , राजस्थान और जैन धर्म में बहुत जगह आपको नागों की पूजा दिखाई देंगी । अज्ञानता वश हमारे हिंदू धर्म में इसका पूजन अब बंद हो गया अथवा इसका महत्व कम हो गया ।

सर्पतत्त्व अथवा नागशक्ति का पूजन अत्यंत सर्वश्रेष्ठ हैं । आगे का वंश बढ़ने के लिए – वंश में शिक्षा सहित धनसंपदा रहना , बीमारी कम रहना , दुःख दोष कम होना , बड़े से बड़ा आध्यात्मिक ज्ञान – प्रगति । यह सभी सर्पतत्त्व के अधिकार में आता हैं ।
कुछ सैकड़ो साल पहले हिंदू धर्म में नाग दिवाली नाम का एक त्यौहार मनाया जाता था ।

🍁 आप इस मंडल को अगर ध्यान से देखेंगे तो इनमें जैन धर्म से जुड़ा ऐसे कुछ भी नहीं हैं । फिर भी जैन धर्म का यह नागमंडल हैं ।
१. मंडल के मध्य में दो नाग देवता हैं । एक अर्ध मनुष्य – अर्ध नाग , दूसरा पूर्ण नाग हैं । दोनों के शरीर एक दूसरे में जाकर गांठे बनी हुई हैं ।
२. दो सर्पो से जुड़ी यह गांठे दो नॉट्स की हैं । मंडल पर अंक भी ११२ लिखा हुआ हैं ।


३. अर्ध मनुष्य रूपी नाग के ऊपर एक देवता बैठे हुए हैं । जिनके दाए हाथ में हल जैसा शस्त्र हैं और वह नीचे की और हैं । बाए हाथ में कुछ हैं , जिसे वह देख रहे हैं । सर पर कमल फूल हैं ।
४. अर्ध मनुष्य रूपी नाग की नाक से दो लाइने निकली हैं , जो प्रधान देवता ने दोनों हाथ में पकड़ी हुई हैं ।
५. मंडल में आठ स्त्री नाग देवियाँ हैं । उनमें से हरे रंग की तीन , केसरी रंग की तीन , गुलाबी रंग की दो नाग देवियाँ हैं।हर एक देवी के हाथों में अलग अलग फूल हैं ।


६. मंडल के नीचे राजा के भेष में पुरुष और एक रानी हैं । ऊपर दो परियाँ हैं । दोनों परियों का रंग अलग अलग हैं । उनके हाथों की स्थिती मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं , उस तरह की हैं ।

 

 

 

 

 

यह नागमंडल बहुत अद्भुत हैं । पहले इसकी पार्श्वभूमी देखते हैं । उसकी कथा समझनी आवश्यक हैं ।

पुराने गुजरात में कमसे कम पंद्रह सौ साल पूर्व जैन समुदाय के जो राजा थे , उनके द्वारा उसे चित्रित किया गया हैं । उस समय जैन संख्या अधिक नहीं थी । परंतु हिंदुओ जैसे गुरुकुल और उतना ज्ञान रखने वाले जैन गुरु , उनके आश्रम थे ।
उस धनवान राजा की कुछ बीमारी लंबे समय से ठीक नहीं हो रही थी । बीमारी ठीक होने के लिए उसने काफी उपाय किए , परन्तु कुछ फायदा नहीं हो सका ।
उन्हें एक व्यक्ति मिला , जिससे बात करने पर वह बोला कि उसकी बीमारी साँप के मिट्टी के सेवन से ठीक हुई और उनके पूजन से सुख भी प्राप्त हुआ । राजाने इस विषय पर अधिक जानकारी माँगी । तो एक जैन गुरु से राजा की भेट करवा दी ।

उन गुरु ने नागलोक , उनकी प्रजाति और उनका गुप्त जगत इस विषय पर थोडासा ज्ञान दिया था । मनुष्य इस नागलोक और उनकी दिव्यता के बारे में नहीं जानते ।
उन गुरु ने दूसरे एक गुरु के पास अधिक जानकारी के लिए राजा को भेजा । जिनका नाम सर्पकोश गुरु था । यह लंबे समय तक राजा का संशोधन जारी था । सर्पकोश गुरु का स्थान आजके युग में आसाम के Kashikotra Village में था । इस मंडल की निर्माण – शुरुआत अथवा जिस जगह से राजा को यह मिला , राजा ने उसकी साधना सर्पकोश गुरु के सानिध्य में की , वह से राजा गुजरात आए ; यह मूल स्थान आसाम का यह जंगल हैं ।

राजा ने वही आश्रम में साधना की , परंतु उन्हें वो किसको देने की अनुमति नहीं थी । परंतु आगे जाकर अपनी पत्नी और आगे की पीढ़ी को उसका फायदा मिले । इसलिए बाद में राजा ने पत्नी को यह सिखाया ।
यह हो गई , मंडल की असल कथा ।

अब हम मंडल का परीक्षण और अभ्यासात्मक ज्ञान लेते हैं ।

🍁 नागमंडल के मध्य में नीले रंग की देवता हैं । नीला रंग जल तत्व का प्रतीक हैं , अतः यह बलराम ( नागों के राजा शेषनाग ) वह हैं । सर पर पगड़ी होना , मंडल के राजा का अधिकार दर्शाता हैं ।


एक हाथ में हल होना मतलब साँप जमीन – पानी दोनों में रहते हैं । हल जमीन को अंदर से उखाड़ता हैं । हल की देवता भी बलराम जी हैं । इस तरह से यह देवता अथवा नागमंडल भूमि और जल से जुड़ा हुआ हैं ।
प्रधान देवता जिस अर्धमनुष्य पर बैठे हैं , उनके नाक से दो मुछे टाइप निकल रहे हैं , जिनको देवता ने दोनों हाथ ने पकड़ा हुआ हैं । वही जल और थल का अधिकार दर्शाता हैं ।
साथ में अर्धमनुष्य नाग देवता की आँखों में देखेंगे तो , एक पुतली काली गहरी और एक सामान्य दिखाई देंगी । इसका अर्थ , वह बाहरी शक्ति को भी देख रहे हैं और अंदर की नागकन्याओं पर भी ध्यान हैं । वह एक नाग गुरु कह सकते हैं ।

🍁 नागमंडल में नीचे राजा रानी हैं । इस मंडल के प्रथम उपासक के रूप में उनके स्थान दिए गए हैं । राजा के सर पर दो फूल हैं , वह दो आशीर्वाद हैं ( एक मुक्ति , दूसरी लोगो तक मंडल पहुँचाना ) ।
रानी ने हाथ में तीन फूल लिए हैं । ( एक पति , जिसने उसे सिखाया । दूसरा मुक्ति और तीसरा गुरूमण्डल के लिए । )

🍁 नागमंडल के ऊपर दो परियाँ हैं । दोनों के रंग अलग अलग हैं । उनके सर पर मांग टिका हैं । वह सुहागन शक्ति दर्शाती हैं । वह हाथों को स्थिती द्वारा मंत्रो को पढ़ रहे हैं , ऐसा दिख रहा हैं ।
राजा रानी और यह दो परियाँ , नागमंडल के चार दरवाजे हैं ।

🍁 नागमंडल में 8 नागकन्या देवियाँ हैं । उनके हाथों में 8 अलग अलग फूल हैं , वह फूल अर्थात उन देवियों को मिला आशीर्वाद – अस्त्र शस्त्र आदि आधिकार फूल रूपांतरित दर्शाया हैं । कुछ लोग इन आठों को बलराम जी की पत्नियाँ कहते हैं , ऐसा नहीं हैं । हम इन्हें राधा जी की अष्टसखियों को 8 शक्ति , जो बलराम जी के पास उनका एक एक तत्व हैं , ऐसा कह सकते हैं । 8 स्तंभ – 8 शक्ति – 8 आशीर्वाद – 8 सुख ।
यह 8 नागदेविया , नागजाती की 8 प्रमुख उच्च जातियाँ हैं ।

🍁 नागमंडल में यह साँप एक दूसरे में मिक्स होकर एक जटिल गाँठे बना रहे हैं । जितनी उसकी गाँठे हैं , उतना वह जटिल हैं । यह गाँठे ताकद , मजबूती और उनकी साधना करना कितना कठिन हैं , वह दर्शाता हैं ।
मंडल के बाहरी हिस्से की गाँठो को ध्यानपूर्वक देखिए । 8 नागदेवीयों की पूछ अंदर के नागदेवता के पूछ में मिलकर , अलग गाँठे बन रही हैं । मतलब चार दरवाजों से गुजरने के बाद इन 8 नागशक्तियों को प्रसन्न करके ही आगे जा सकते हैं ।

ℵ© This Article & Research Publish by SriVidya Pitham .
Please do not copy and share .

Join Our SriVidya Pitham Courses 

Contact : 9860395985

 

Share

Written by:

210 Posts

View All Posts
Follow Me :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

three + 11 =

error: Content is protected !!
× How can I help you?