कालिकुल श्रीविद्या अंतर्गत महाकालेश्वर विज्ञान

कालिकुल श्रीविद्या अंतर्गत महाकालेश्वर विज्ञान

कालिकुल श्रीविद्या अंतर्गत महाकालेश्वर विज्ञान

|| कृं महाकालेश्वर नम: ||

नमस्ते मित्रों ,
श्रीविद्या पीठम द्वारा कालिकुल श्रीविद्या अभ्यास पद्धति में स्वागत हैं ।

कालिकुल श्रीविद्या अभ्यास आजतक सबसे अभिज्ञ रहा हैं । इसका सिर्फ नाम आगे आया हैं । परंतु _ कालिकुल श्रीविद्या विषय पर कही भी जानकारी उपलब्ध नहीं हैं ।
अज्ञानता वश काफी लोग यही समझ बैठते हैं की , कालिकुल श्रीविद्या में शिव पत्नी काली का अभ्यास हैं ।
नहीं _ मित्रों !
शिव पत्नी काली यह संपूर्ण विषय मूल कालिकुल श्रीविद्या से अलग हैं ।
महाविद्याओं का यही तांत्रिक ज्ञान जिसे समझ आया , वह आगे बढ़ा । अन्यथा कितने साधक सिर्फ माला लेकर मंत्रो के जाप करते हैं । परंतु _ ज्ञान शून्य ।

इस लेख में हम बात करने जा रहे हैं , महाकाली के पति महाकालेश्वर शिव के बारे में ।
🩸 महाकालेश्वर शिव कौन हैं ?
ऑटोमिक नंबर ६ अर्थात कार्बन का महाकालेश्वर शिव से क्या संबंध हैं ?
महाकालेश्वर शिव और महाकामेश्वर शिव इनमें क्या संबंध हैं ?
६ स्मशान – ६ रक्त और महाकाल सिंहासन क्या हैं ?

श्रीविद्या पीठम एडवांस तांत्रिक संशोधन का केंद्र हैं ।
जैसे श्रीकुल श्रीविद्या हैं । वैसे ही कालिकुल श्रीविद्या भी हैं ।
अगर 🟡 सूर्य शक्ति_ श्रीललिता त्रिपुरसुंदरी हैं, तो उसे संतुलित करने वाली 🌙 चंद्र शक्ति_ श्रीमहाकाली हैं ।
उसी तरह उनके पति भी हैं ।
महाकाली के पति महाकालेश्वर शिव हैं ।
हर समय शिव इस शब्द का अर्थ सिर्फ पार्वती के पति नहीं होता । काफी लोग यही भूल करते हैं । पार्वती देवी के पति भगवान शंकर को भी लोग अज्ञानता वश कामेश्वर शिव और कालेश्वर शिव ही कह बैठते हैं ।

कालिकुल श्रीविद्या साधना में 🩸रक्त , 🦴हड्डी , 🧘 त्वचा इनका और इनमें छुपे इतिहास का अभ्यास हैं । रक्त में प्राचीन अनुवांशिकता होती हैं ।

महाकालेश्वर शिव _ आजके वैज्ञानिक भाषा में ☢️ ऑटोमिक नंबर ६ का प्रतिनिधित्व करते हैं । यह कार्बन तत्व को दर्शाता हैं ।
इनका सिंहासन भी 🔯 षटकोन टाईप का हैं । षटकोन अर्थात ६ त्रिकोण इसमें आते हैं । हर त्रिकोण _ एक स्मशान , एक रक्त तत्व दर्शाती हैं ।
स्मशान सिर्फ मनुष्यों के लिए नहीं हैं । हमारे मनुष्य समाज में भी गांव गांव में हर जाति का अलग अलग समशान होता हैं । एक जाति के लोग दूसरे जाति के स्मशान में मृतक शरीर नहीं जलाते । इसके पीछे भी काफी कारण हैं ।
जैसे मनुष्य स्मशान हैं , वैसे ही जंगलों में प्राणी पशु पक्षी मरते हैं । पेड़ पौधे मरते हैं । नदी , तालाब और समुंदर में जलचर मरते हैं । उनका भी स्वतंत्र स्मशान होता हैं ।

उसी तरह से 🩸रक्त तत्व का भी हैं ।
रक्त से सिर्फ मनुष्य ही जीवित नहीं रहता । 🦜पशु प्राणी का रक्त , 🌳पेड़ के अंदर भी रक्त होता हैं । 🐟 जलचर जीवों में भी रक्त होता हैं । इन सबका अभ्यास कालिकुल श्रीविद्या साधना में आता हैं ।
यह एक विस्तारित विषय हैं ।

Join Kalikul SriVidya Essentials Course .

Link 🔗 https://srividyapitham.com/kalikul-srividya-essentials/

© Article Publish by SriVidya Pitham .

Share

Written by:

210 Posts

View All Posts
Follow Me :
error: Content is protected !!
× How can I help you?