श्रीकृष्णजी ने 16,108 महिलाओं से शादी की थी ?

श्रीकृष्णजी ने 16,108 महिलाओं से शादी की थी ?

श्रीकृष्णजी ने 16,108 महिलाओं से शादी की थी ?

ह्रीं
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श्रीविद्या पीठम में आपका स्वागत हैं ।
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यह लेख श्रीविद्या पीठम द्वारा लिखा गया हैं । यह लेख एक अनोखी जानकारी तथा दुनिया से छुपी हुई एक रहस्य कथा हैं ।
सही समय पर सही ज्ञान प्राप्त होना भी जरूरी हैं ।

अनेकों वर्षों से भागवत कथा पुराण आदि चल रहे हैं । जो सिखाया जाता हैं , वही आगे चल रहा हैं । और लोग बस हाथ ऊपर करके हरे रामा हरे कृष्ण कहकर कथाओं की भक्ति में तल्लीन हो जाते हैं ।

मूल तक कौन पोहोचेंगा ?
आज महाभारत को होकर ही कई हजारों साल गुजर चुके हैं । जो 5 हजार साल का हिसाब लगाया जाता हैं , वह एक गलत प्रथा पड़ चुकी हैं ।

आज हम एक किस्से के बारे में बात करेंगे ।
क्या सच में , श्रीकृष्ण जी ने 16,108 महिलाओं से शादी की थी ?

आज जो महाभारत आप पढ़ते हैं , उसमें आधा तो मन की कहानी हैं । आधे भाग के आधे में जोड़ तोड़ की कहानी हैं । सत्य बचा 25% ।

नरकासुर के यहाँ जो बंदी महिलाएँ थी , उनकी द्वापरयुग की गिनती 16,108 थी । वही गिनती कलियुग के अनुसार 16,00,108 हो जाती हैं । कितना बदलाव हैं , देखिए ।

नरकासुर ने 16,108 महिलाओं को पृथ्वी के ऊपर से बंदी नहीं बनाया था । वो तो अनेको अलग अलग लोक , स्थान में विचरण करने वाली शक्तियाँ होती हैं , अलग अलग जगत होता हैं और वह राज करने वाली जो शक्तियाँ होती हैं । उनमें से कुछ रानियां , राजकन्याएँ , दासियां तथा अन्य शक्तियाँ थी । वह सभी जरासंध के यहाँ पेड़ो में बंद थी ।

अब आगे की गहन सत्य को समझते हैं ।
श्रीकृष्ण जी ने आजतक शादी ही नहीं की , यही बड़ा सत्य हैं जो छुपा हुआ हैं ।
श्रीकृष्ण जी का एक अंश रूप श्री विठ्ठल नाम से हैं , जिनकी पत्नी श्री रुक्मिणी हैं । वही श्री विठ्ठल रूप को श्रीकृष्ण जी ने भेजा था । साथ में अपना एक और अंश दिया था ।
जब उनका पैर उस नरकासुर के बन्दी जगह पर पड़े , तब वह 16,108 महिला शक्तियाँ बंदिवास से मुक्त हुई ।

तथा जो श्रीविठ्ठल रूप के साथ दूसरा अंश था , उसीने अपने अंदर से 16,108 समान अंश जो श्रीकृष्ण की तरह दिखने वाले ; परन्तु वह श्रीकृष्ण नहीं थे । उनसे उनकी शादी हुई ।

इस छोटीसी कहानी दिल छू लेती हैं और अनेको सवाल पैदा करती हैं की ओर क्या रहस्य छुपे हुए हैं ?

( यह लेख श्रीविद्या पीठम द्वारा लिखा गया हैं । )

© धन्यवाद ।

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