Sri Uddanda MahaGanesh

Sri Uddanda MahaGanesh

।। श्रीविद्या साधना अंतर्गत श्रीउद्दण्ड महागणेश ।।

      उद्दण्ड महागणेश


नमस्ते मित्रों , श्रीविद्या पीठम ठाणे में आपका स्वागत है। कुछ दिनों से श्रीविद्यासाधना के शिविरों में मुंबई पुणे नाशिक में व्यस्त होने के कारण कुछ लेख पोस्ट करने नहीं आए ।

श्रीविद्यासाधना विषय गहरा है और गुरु के संगत में ही लेना आवश्यक है , इसलिए हर व्यक्ति साधक को अलग से समय देना चाहता है।

इसी श्रीविद्या में पहली साधना श्रीमहागनपति की होती हैं। श्रीमहागनपति साधना के बिना कोई भी श्रीविद्या की शुरुआत होती नहीं। जिस प्रकार से शिव पार्वती के पहले गणपति पूजन आवश्यक है , उसी प्रकार श्रीविद्या में कामेश्वर कामेश्वरी की साधना में उनके पुत्र क्षिप्रा प्रसाद महागणपति साधना पूजन आवश्यक है।

जो इनकी साधना के बिना श्रीयंत्र पूजन अथवा श्रीविद्या दीक्षाए लेता है , वह साधक मंडल शक्तियों द्वारा मानसिक शारीरिक स्वरूप से भ्रष्ट हो जाता हैं । इसलिए गुरु परंपरा को महत्व है।

श्रीविद्या महागणपति में अनेक रूप है , उसीमे एक श्री उद्दंड महागणेश जी हैं।

आप उनकी फोटो देखिए , जो मैने पोस्ट की है।
दस हातो में अलग अलग अस्त्र शस्त्र है ।

यह उद्दंड गणपति , ये बहुत क्रोधीष्ट रूप है गणपति का , दण्ड देने तथा Punishment के लिए बहुत जल्दी प्रेरित रहते हैं। इनका दण्ड बहुत ही भारी होता है । इनकी त्वचा लाल रंग की है और अपने पत्नी शक्ति के साथ यह विराजमान हैं।
महागणपति के दाएं हाथ में अनार फल होता है , परंतु इनके हातो में बाए हात में अनार फल है।

कभी भी शरीर का दाया और बाया अंग में जो अस्त्र शस्त्र होते हैं , उनका अलग ही महत्व होता है। जैसे दाया शरीर ब्रम्ह कह सकते हैं और बाया शरीर माया कह सकते हैं।

उद्दंड महागणेश एक आक्रमक देवतां है । भक्तों को न्याय देना , कोई व्यक्ति बहुत सारी उलझनों में फंसा है और उलझने भी ऐसी है की उसका कोई मार्ग नहीं है , तब जाकर ये गणेश कार्य करते हैं।जो व्यक्ति उन्मत्त बनता है , लोगो पर अत्याचार करता है , तथा अनजान अथवा अन्य लोगो पर ज़बरदस्ती मनमर्जी के खिलाफ करके किसी काम के लिए लगाता है , धार्मिक संस्थाओं में भी कोई व्यक्ति किसी अन्य लोगो को उनके मनमर्जी के खिलाफ ज़बरदस्ती करके शामिल होने को कहता है , किसी चीज का अहंकार होना , गलत साधनाओ से अहंकार होना आदि चीजो में यह गणेश जी दण्ड प्रदान करते हैं ।

इनको अपने पिता की तरह 3 री आँख है।

आयुधों की बात करे तो , इनकी हातो में
1) पुष्पशरा है : – भक्तों को सही आध्यात्मिक ज्ञान देने के लिए
2) अमृतकलश :- अमृतकलश गणेश जी ने नीचे हाथों में पकड़ा है , मुलाधार की जगह । सहस्रार से टपकने वाला अमृत उसमें पकड़ने के लिए । उसका भी कारण है ।
3) पद्म : भक्तों को साधना और ज्ञान के मूल में जाने के लिए प्रेरित करता है ।
4) शालिप्प्लव : चावल का धान को यह नाम है। खेती के लिए बारिश जरूरी होगी , इस दर्शाता है।

आज हम इतना ही इस गणेश के विषय पर बता सकते हैं। बाकी आयुध विषयो का ज्ञान और कार्य गुप्त है । यह श्रीविद्या साधना में अतिरिक्त ज्ञान दिया जाता हैं ।

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