Sri Vidya – Sadashiv Tatva (सदाशिव तत्व) 4

Sri Vidya – Sadashiv Tatva (सदाशिव तत्व) 4

◆ श्रीविद्या अंतर्गत सदाशिव तत्व का अभ्यास ◆
भाग : 4 ( सदाख्य कला )

श्रीविद्या साधना में पंचदशी की दीक्षा से पहले साधक को 36 तत्वों को ओर पंच कलाओ को समझना होता है । अगर इसे नही समझा गया तो फिर साधना शून्य है ।

श्रीयंत्र में बिंदु को बैन्द्व चक्र भी कहा जाता है । इसको ब्रम्हांड बीज भी कहते हैं। शांभवी विद्या , कादि हादी सादी विद्याओं की कलाए भी यही अनुभव मिलता है ।
इसी बिंदु को हमारे शरीर मे आज्ञा चक्र की जगह स्थान दिया है। ये दो दल वाला कमल , एक दल में ” ह ” अक्षर है और दूसरे दल में ” क्ष ” अक्षर है ।
हं यानी हँसवती शक्ति ओर क्षं क्षमावती शक्ति ।
यही पर हाकिनी शक्ति होती है।
इसी दो दलों में आकाश तत्व है ओर दूसरे में सदाशिव तत्व है , यही सदाशिव तत्व को शांत्यतित कला कहते हैं।

इसी आज्ञा चक्र के दो दलों के मध्य सेंटर पॉइंट पर आत्मज्योति है । यह सेंटर पॉइंट को श्रीविद्या में रक्तबिन्दु कहते हैं।
यह वह प्रकाश है जिससे चन्द्र – सूर्य – अग्नि भी प्रकाशमान होते हैं।
इसी आज्ञा चक्र पर श्रीयंत्र के मध्य बिंदु का ध्यान करना चाहिए , उसीमे बिंदु के अंदर अंतिम उन्मना नामक महाबिन्दु का भी स्थान है ।

यह वह स्थान है , जहाँ साधक के अंदर के शिव-शक्ति रूप बिंदु …….. विराट विश्व मे व्याप्त मूल शिव-शक्ति रूपी महाबिन्दु से मिलते हैं । इन दोनों का एकत्रीकरण का बिंदू ही सदाशिव तत्व है।
ओर यही महामृत्युंजय विद्या प्रगट होती है।

परशिव जगत्-सृष्‍टि के लिए जब इच्छा करता है, तब वह स्वयं ‘शिवतत्व’ और ‘शक्‍तितत्व’ बन जाता है।

ये दोनों मिलकर आगे उत्पन्‍न होने वाली चित् और अचित् सृष्‍टि के कारण बनते हैं।
इन दोनों में से ‘शक्‍ति’ जब अपने ज्ञानांश से ‘इदन्ता’ का प्रथम स्फुरण करती है तब उसको ‘सदाशिव-तत्व’ कहते हैं।

उसी सदाशिवतत्व को ‘सादाख्य’ शब्द से संबोधित किया गया है।
अगर आप श्रीविद्या साधक है , फिर आपके गुरु ने यह सादाख्य कला क्या होती है , बताया होगा ।
इसके बिना आपकी अद्वैतता अपूर्ण है । ये अत्यंत गूढ़ रहस्य ज्ञान है ।

श्रीविद्या में बिंदु को ” रक्त बिंदु ” कहा है और महाबिन्दु को ” श्वेत बिंदु ” कहा है । और महाबिन्दु में स्थित शिव-शक्ति की कला ” शांत्यतित कला ” कही जाती हैं।
सामान्य साधक को यह समझना बहुत मुश्किल है , इसलिए श्रीविद्या साधक को अपने गुरु से रूबरू होकर इसकी जानकारी प्राप्त करनी चाहिए ।

महाबिन्दु में स्थित शिवशक्ति के 15 गुप्त भुवन है , जिन्हें बैन्द्व पुर कहते हैं। इसमे शक्ति के 5 ओर शिव के 10 गुप्त भुवन है ।

शक्ति के गुप्त भुवन में शांत्यतित – शांति – विद्या – प्रतिष्ठा – निवृत्ती नामक 5 गुप्त भुवन है , ये 5 कलाए भी है ।
इसीमे शक्ति के शांति नामक गुप्त भुवन में ओर अंदर 18 तत्व है , ….. सदाशिव – ईश्वर – शुद्ध तत्व
इस तरह से श्रीविद्या में इसको बताया गया है ।

सदाशिवतत्व को ‘सादाख्य’ शब्द से संबोधित किया गया है।
यह सादाख्य सकल (साकार) कहलाता है।

सादाख्य का जो सकल स्वरूप है उसका अनुभव सामान्य जनों को नहीं होता, किंतु योगी, ज्ञानी और मंत्रोपासना करने वाले उच्‍चकोटि के साधकों को पूजा, ध्यान आदि के निमित्‍त पर शिव अपनी शक्‍ति के सादाख्य का स्फुरण करता है ।

यह एक श्रीविद्या में सदाख्य कला है ।
( आकृति को ध्यान से देखिए , तभी कल आने वाले पोस्ट की आकृति ओर लेख समझ पाएंगे । )

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