Unknown Facts of SriVidya 🔻

Unknown Facts of SriVidya 🔻

श्रीविद्या के अनभिज्ञ विषय …..

श्री कुल में जाना हो तो विष्णु कला सीखनी होगी
काली कुल में जाना हो तो शिव कला को प्राप्त करना होगा
और दोनों ही कुल की साधना हेतु ब्रह्म को समझना होगा ।
वो तुम हजारो की भीड़ वाली श्रीविद्या में अमूल्य ज्ञान प्राप्त भी नहीं कर सकते । अनंत कलाओं का साक्षात्कार गुरु के संगत से ही होता हैं , न कि हवाओं भ्रमिष्ट स्वरूपी में बात करने से ।

विष्णु कला

विष्णु कला का अर्थ अपने भीतर के विशेष अणु को समजना तुम अभी योगनिंद्रा में हो वो परम पुरुष की जिसको जगाने हेतु पहले शेष को समजाना पड़ेगा

राम और लक्ष्मण कृष्ण और बलराम
राम जन्म में शेष छोटे थे ये कुंडलिनी की एक मर्यादा अवस्था थी जो आत्मा के साथ ध्यान की खोज लगाने हेतु 14 साल वनवास अंतर काटा 7 अवरोध ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर

संहार से सृष्टि और सृष्टि से संहार यही क्रम साधना का है मूल से मनुष्य तक और मनुष्य से मूल तक

जब कि कृष्ण अवतार में वो बलराम रूप से अमर्यादित शक्ति से जुड़ी जो स्थिति पूर्ण पुरषोत्तम की हुई जिन्होंने साक्षी को बुद्धि या ज्ञान देने की कोशिश की किन्तु साक्षी तो सारी लीला के भीतर मौन ही रहा ये कुंडलिनी की दूसरी अवस्था

तीसरी अवस्था बुद्ध की हुई जिसने आत्मा यानी राम और साक्षी यानी कृष्ण ये दोनों की अवस्था को समझने के बाद ये द्रष्टा खुल गया द्रष्टा को न लक्ष्य चाहिए नही बल द्रष्टा को केवल निर्वाण से लेना देना है यहाँ संकल्प विकल्प दोनों ही छूट गए

चौथी अवस्था आएगी कल्कि की जहाँ आत्मा साक्षी द्रष्टा जो समय के उस पार निकल जायेगा और स्वधर्म की स्थापना करेगा कल्कि का अर्थ काल को काटने वाला यहाँ शेष अपने अणु में वापस स्थिर हो जाएगा जिससे अंनत ऊर्जा का प्राकट्य होगा प्रलय का एक अर्थ प्रति लय है लय की उत्त्पति पर जाना जहाँ वो जीव शिव और नर नारायण हो जाएगा और अपने मूलधर्म की स्थापना करेगा

ये अवतारवाद उसके भीतर प्रकट होगा जो विशेष अणु से बना होगा या जिसने ये विशेष अणु को जाग्रत कर लिया होगा । 

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