श्री बाला त्रिपुरसुंदरी साधना
ह्रीं _ श्रीविद्या पीठम में आपका स्वागत हैं ।
श्रीविद्या साधना पद्धति में चौथे स्तर पर ” श्री बाला त्रिपुरसुंदरी साधना ” की जाती हैं ।
आपका पूर्वकर्म ( १. महागणपति २. राजमातंगी ३. महावराही ) यह तीन साधना पूर्ण होने के उपरांत श्री बाला त्रिपुरसुंदरी साधना की जाती हैं ।
श्रीविद्या पीठम द्वारा यह साधना संपूर्ण विधियुक्त पद्धति अनुसार सिखाई हैं । इसमें तर्पण , यंत्र पूजन का अत्यधिक महत्व हैं ।
” श्रीबाला त्रिपुरा ” यह देवी श्रीललिता त्रिपुरसुंदरी की पुत्री हैं । तथा वह श्री महागणपति की छोटी बहन हैं । ब्रह्मविद्या तथा आधी श्रीविद्या साधना के समकक्ष इनकी साधना होती हैं ।
Importance _
१. श्री बाला त्रिपुरसुंदरी साधना यह Mental Health के लिए लाभदायक हैं । मस्तिष्क – बुद्धि संबंधी कार्य इनके पास आते हैं । साधक में मानसिक बौद्धिक परिपक्वता आती हैं ।
२. कुंडलिनी जागरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं । कुंडलिनी जागरण का अर्थ पूर्व जन्मों के पाप – पुण्य के आधार पर मनुष्य जन्म होता हैं और ग्रहों की दिशा – दशा मार्ग बदलती हैं । आपकी बिगड़ी कुंडली अर्थात पूर्वजन्म की दशा को स्थिर करने की प्रक्रिया अर्थात ” कुंडलिनी जागरण ” हैं ।
३. यह साधना पद्धति अत्यंत दुर्लभ हैं । क्योंकि यह देवी श्रीललिता की पुत्री हैं । यह देवी शांत शीतल गुण वाली हैं । इनकी साधना से स्वयं श्रीललिता भी प्रसन्न होती हैं ।
४. अत्यंत पवित्र साधना होने के कारण , इनमें सभी प्रकार के लाभदायक गुण हैं । कुलदोष , पितृदोष , ग्रहदोष शमन करने की क्षमता इनमें हैं ।
{ अचानक कोई भी उठकर यह साधना नहीं कर सकता । पवित्र साधना के पवित्र नियम होते हैं । मंत्र जाप करना , इसे दीक्षा नहीं कहते । }
Note _
यह साधना श्रीविद्या पीठम में स्वतंत्र करना हो तो , श्री लघु गणेश साधना एक महीना करने के उपरांत आप कर सकते हैं ।
अन्यथा _ श्रीविद्या दीक्षा पद्धति यह चौथे स्तर पर सिखाई जाती हैं ।
Book _


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