श्रीवराही की अष्टदिग्गज शक्तियां
नमस्कार ,
श्रीविद्या पीठम में इस लेख द्वारा आपको देवी ” श्री महावराही ” यंत्र की जानकारी प्रस्तुत करेंगे ।
सर्वप्रथम आपको ज्ञात होंगा ही , श्रीविद्या दीक्षा पद्धति में तीसरे स्थान पर श्री महावराही साधना आती हैं । इन्हें श्री शुकरनाथा अथवा श्री दंडनाथा भी कहते हैं । पंचदशी दीक्षा ( श्रीयंत्र साधना ) भी श्री वराही साधना बिना अधूरी हैं ।
इस लेख में देवी वराही की एक प्रमुख शक्ति ” अष्टदिग्गज ” इनके बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे । दिग्ग्ज शब्द को दिक्पाल भी कहते हैं । दिक्पाल अर्थात देवताओं के महल के बाहर ८ दिशाओं की संरक्षण शक्तियाँ ।
अष्टदिग्गज कौन हैं ?
यह ८ हाथियों का समूह हैं । यह समूह देवी वराही के राजमहल के बाहर ८ दिशाओं में संरक्षण की भूमिका निभाते हैं ।
इसके लिए आपको नीचे दी गई आकृति देखनी होगी । इसमें देवी वराही का यंत्र हैं और ८ हाथियों की दिशा दिखाई हैं । इनकी शक्ति महाप्रचंड हैं ।
ये स्वयं ८ गज ही स्वयं के वाहन हैं , स्वयं ही स्वयं के स्वामी हैं । इनका कोई महावत नहीं हैं । यह खुद ही स्वयं के महावत हैं ।

दिग्गज का अर्थ _
हजारों हाथियों के समूह की शक्ति जिस एक हाथी में होती हैं , उसे दिग्गज कह सकते हैं । इसमें इंद्र के ऐरावत जैसे कई कई हजारों हाथियों का एकत्रित बल होता हैं ।
( कुछ जगह आपको १०००० हाथियों के एकत्रित बल को , एक दिग्गज हाथी कहते हैं । और १०००० दिग्ग्ज हाथी की एकत्रित बल जिसमें होता हैं , उसे ऐरावत कहा हैं । और १०००० ऐरावत हाथियों का बल एक इंद्र में होता हैं । अब यह दिग्गज शक्ति की तुलना देवी श्री वराही के दिग्ग्ज से नहीं होंगी । )
कुछ उच्चतम देवताओं के पास इंद्रादि लोकपाल की जगह यह अष्ट दिग्गज होते हैं । एक बड़ा अभेद्य पर्वत , अभेद्य दीवार _ जिसे कोई भेद नहीं सकता , यह अष्ट दिग्गज शक्तियां हैं ।
श्रीवराही से संबंध _
देवी वराही का अष्ट दिग्गज के साथ एक स्वतंत्र रूप हैं । यह स्वतंत्र ८ गज देव हैं और उनकी पत्नियां भी गज देवी हैं । वराही के एक स्वतंत्र रूप से इनका जन्म हुआ हैं । हर दिग्गज के पैर का तलवा , कान , सूंड , पूछ पर लक्षण और चिन्ह होते हैं । हर एक के पूछ में फर्क होता हैं । कुछ दिग्ग्ज के बड़ी दांतों पर मंत्र लिखे होते हैं । सबको तीसरा नेत्र होता हैं , अर्थात यह मणि होता हैं ।
इन आठों को अपने अस्त्र शस्त्र शक्ति हैं । देवी श्रीललिता और महागणपति से उन्हें वराही द्वारा आशीर्वाद मिले हैं । क्योंकि यह गज शक्ति होने के कारण उनका सीधा संबंध श्री ललिता पुत्र श्रीमहागणपति से आता हैं ।
जब यह दिग्गज देवी वराही पर अभिषेक करते हैं , तब उनके सूंड द्वारा जल – तीर्थ – दूध – सोने का पानी आदि प्रवाहित होता हैं । यह आठों जरूरत पड़ने पर गज देव बनते हैं और पूर्ण गज भी बनते हैं ।
श्रीललिता से संबंध _
देवी श्रीललिता हमेशा अपने श्रीयंत्र राजमहल में नहीं होती । श्रीयंत्र यह उनकी कर्म भूमि हैं । उनकी मातृभूमि नहीं । इसलिए जब देवी श्रीललिता _ श्रीयंत्र बाहर जाती हैं तब कभी कभी यह दिग्गज शक्ति अपने साथ लेकर जाती हैं ।
श्रीवराह गणपति से संबंध _
यह आठ गज शक्ति होने के कारण इनका प्रतिनिधित्व भी एक गज शक्ति ही करेंगी । देवी श्रीवराही का अपना स्वतंत्र पुत्र हैं , उन्हें ” श्री वराह गणेश ” कहते हैं । यही उन आठों का प्रतिनिधित्व करते हैं । जब श्रीवराह गणेश उनके साथ होते हैं , तब आठों गज एकत्रित होकर एक ही महागज रूप लेते हैं और उनके आठ सूंड होते हैं । साथ में उनके पीठ पर आठ मणि बनते हैं ।
आप कल्पना कीजिए । जब श्रीयंत्र राजमहल बन रहा होंगा । तब देवी श्रीललिता ने अपने प्रवेशद्वार की मुख्य दरवाजे पर कितने कितने दिनों तक मंत्रशक्तियाँ प्रकाशित की होंगी । वह सर्व सामान्य दरवाजा नहीं हैं । ऐसे १०० दरवाजों की ताकद एक एक दिग्ग्ज में हैं ।
अष्ट दिग्गज के नाम _
१. ऐरावत २. पुंडरीक ३. वामन ४. कुमुद ५. अंजन ६. पुष्पदंत ७. सुप्रतीक ८. सार्वभौम
हमने यहां श्रीविद्या साधना अंतर्गत श्रीवराही के परिवार देवता अथवा उनके यंत्र के एक भाग का अर्थ बताया हैं ।
हमारा श्रीविद्या पीठम द्वारा संपूर्ण श्रीविद्या पद्धति साधना और सूक्ष्म ज्ञान दिया जाता हैं । आप हमसे साधना हेतु संपर्क कर सकते हैं ।
धन्यवाद ।